Bootloader और Kernel का क्या मतलब है
आजकल स्मार्टफोन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है और लगभग हर किसी के पास आपको एक स्मार्टफोन तो आसानी से मिल जाएगा। ऐसे में हमें Android से रिलेटेड कुछ ऐसे चीजों की जानने की उत्सुकता होती है जिसको हम अपने फोन में इस्तेमाल करके हमारे फोन का लुक चेंज कर सके या उसके बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करके कुछ ऐसा बना सकें। जो फोन की स्पीड के लिए बहुत ही जरूरी हो। आज मैं जिसके बारे में आपको बता रहा हूं उसके ऊपर आपको इंटरनेट में बहुत सारे आर्टिकल मिल जाएंगे। क्योंकि यह बहुत ही पॉपुलर आर्टिकल है कि बूट लोडर क्या होता है और Kernel क्या होता है और इस का क्या काम होता है।
जब भी आप अपने एंड्रॉयड मोबाइल को रूट करते हैं या कस्टम रोम इनस्टॉल करते हैं तो Bootloader और Kernal का नाम जरूर आता है। अगर आप अपना मोबाइल रूट करना चाहते हैं तो आपको इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है। आज इस आर्टिकल में हम आपको बूट लोडर और Kernal क्या है इसके बारे में बताएंगे। यह कैसे काम करता है और इसकी रूट और कस्टम रोम इंस्टाल करने में क्या जरुरत होती है। इसके बारे में आर्टिकल में हम बात करेंगे।
[gt_heading id=”gt-heading-48″ tag=”h1″ type=”double-separator” text_align=”left” icon=”” separator_color=”#dd0000″ font_size=”” font_color=”” font_weight=”normal” css=””]Bootloader क्या है?[/gt_heading]जब हम अपने मोबाइल को स्विच ऑन करते हैं तो सबसे पहले RUN होने वाले प्रोग्राम को बूट लोडर कहते हैं बूट लोडर एंड्रॉयड के ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड करता है। यह कैसा इन्सट्रक्शन पैकेज है जो ऑपरेटिंग सिस्टम Kernel को बूट करने का संदेश देता है। एंड्रॉयड डिवाइस में बहुत सारे पार्टीशन होते हैं जिसमें की डाटा स्टोर होता है जैसे की सिस्टम की फाइल और Android एप्लीकेशन डाटा रखने के लिए अलग से फाइल। यह सब पार्टीशन के लिए बूट लोडर सिक्योरिटी चेक पॉइंट है। जो डिवाइस स्टार्ट होने से पहले एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम की सभी फाइल को चेक करता है अगर कोई फाइल नही मिलती है तो ऑपरेटिंग सिस्टम RUN नहीं करेगा। सभी स्मार्टफोन में अलग-अलग बूट लोडर होगा जो स्मार्ट फोन बनाने वाली कंपनी ने अपने फोन के रिक्वायरमेंट के मुताबिक डिजाइन किया हुआ होता है जिससे कि वह सभी पार्टीशन की फाइल चेक करके ऑपरेटिंग सिस्टम को RUN कर सके।
Android मोबाइल में बूट लोडर ज्यादातर Lock कंडीशन में आते हैं क्योंकि कंपनी यह नहीं चाहती कि आप उनसे बनाए हुए प्रोग्राम में कोई छेड़छाड़ करें या फिर कोई दूसरा ऑपरेटिंग सिस्टम या कस्टम रोम इस में इंस्टॉल करें। अगर आप बिना अनलॉक किए हुए बूट लोडर में कस्टम रोम इन्स्टाल करेंगे तो आपका फोन खराब हो जाएगा। ऐसे में अगर आपको कस्टम ROM इन्स्टाल करनी है तो सबसे पहले आपको बूट लोडर अनलॉक करना पड़ेगा। Bootloader Unloack करने के कई प्रोसेस है। यह हर फोन में अलग-अलग होती है। कुछ फोनों में यह आसानी से UnLock हो जाती है लेकिन कुछ फोन में अनलॉक कोड की जरूरत पड़ती है।
[gt_heading id=”gt-heading-828″ tag=”h1″ type=”double-separator” text_align=”left” icon=”” separator_color=”#dd0000″ font_size=”” font_color=”” font_weight=”normal” css=””]Kernel क्या है?[/gt_heading]अगर आप एंड्रॉयड, iPhone, MacOS, और विंडो यह सभी ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करते हैं तो इन सब ने Kernel होता है। Kernel का काम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच में कम्युनिकेशन करने का होता है। इसका मतलब है कि जब हार्डवेयर को software के लिए काम की जरूरत पड़ती है तब Kernel रिक्वेस्ट करता है।
उदाहरण के तौर पर अगर आपके फोन में आपको कैमरा ओपन करना है तो Kernel आपके हार्डवेयर को यह बताता है कि अब मुझे कैमरा हार्डवेयर की जरूरत है और आप इसको मेरे सॉफ्टवेयर के साथ कम्युनिकेट कीजिए। तो यह काम Kernelकरता है। Android मोबाइल में हम लगभग दिन एक जैसा Kernel देखने को मिलता है। Android यूज में Kernel के बहुत सारे स्पेसिफिक कोड डाले जाते हैं ताकि हर एक सिंगल पर काम के लिए अलग code का इस्तेमाल किया जा सके। इससे फोन की स्पीड फास्ट हो जाती है अगर Kernel का सही इस्तेमाल किया जाए तो फोन की बैटरी लाइफ भी बढ़ जाती है।