भारत के 5 सबसे ज्यादा रहस्यमय स्थान
भारत दुनिया के कुछ रहस्यमय देशो में गिना जाता है भारत प्राचीनकाल में ज्ञान विज्ञानं का केंद्र रहा है भारत का तंत्र मंत्र और इतिहास दुनिया को भारत की ओर आकर्षित करता है और यह सिलसिला आज भी जारी है पर समय बदलने के साथ दुनिया का नजरिया भारत के प्रति बदल गया है वह आज भारत को एक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था मानते हैं.
भारत रहस्यमय देश इसलिए है क्योंकि भारत में कुछ ऐसी जगह है जो बहुत रहस्यमय है और उनकी एक अपनी विशेषता और इतिहास है तो मैं आज आपको भारत की कुछ ऐसी जगह के बारे में बताऊंगा जिनके बारे में कुछ अविश्वसनीय तथ्य है और वो कुछ रहस्यमय स्थान है तो देखो |
1 . रूपकुंड झील
रूपकुंड एक हिम झील है जो उत्तराखंड राज्य में स्थित है और इसे रूपकुंड कि कंकाल जीवी के नाम से भी जाना जाता है इसलिए इसे कंकाल जी की कहा जाता है क्योंकि यह अपने किनारों पर पाए गए 500 से ज्यादा नरकंकाल के लिए प्रसिद्ध है यह स्थान बिल्कुल निर्जन है और यह हिमालय पर लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यहां तक जाने का रास्ता बिल्कुल मुश्किल है इसलिए यह एडवेंचर ट्रैकर के लिए बहुत पसंदीदा जगह है यह जगह यहां पर मिलने वाले नरकंकालों के लिए चर्चित है झील के चारों ओर बर्फ के बड़े-बड़े है गर्मी बढ़ने पर बर्फ पिघलने लगती है तो यहां नरकंकाल मिलना आम बात हो जाती है और बहुत ही नरकंकाल मिलते हैं यहां तक की झील की तलहटी में देखने पर भी नरकंकाल मिल ही जाएंगे इस झील के चारों ओर नर कंकाल की खोज सबसे पहले 1942 में भारतीय वन विभाग के अधिकारी ने की थी वह वहा एक फूल की खोज में गया था और वहां उसका पैर किसी ऐसी चीज से टकराया और वह जेल में जा गिरा
और उसे वहां कुछ नर कंकाल मिले रहस्य तब ज्यादा गहरा हो गया तब वहां नरकंकाल का ढेर पाया गया थोड़ी खोज के बाद देखा कि वहां झील की तलहटी में भी बहुत नरकंकाल है पहले तो स्थानीय लोगों का अंधविश्वास से यह कहना था कि यह नर कंकाल किसी राजा और उनके समूह की है जो वहा किसी देवी की पूजा करने आए थे और देवी ने उन्हें सराफ से नष्ट कर दिया पर कुछ विज्ञानी विज्ञानिक रिसर्च के बाद कुछ अलग तर्क सामने आए साल 2004 में युरोपियन दल के कुछ वैज्ञानिकों ने इस जगह का दौरा किया और उन्होंने इन हड्डियों की DNA टेस्ट करके पता लगाया कि यह कंकाल किसी एक समूह के नहीं है यह वहां रहने स्थानीय लोगों के अलग-अलग समूह के हैऔर इनकी मौत किसी महामारी के फेलने से हुई थी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की कार्बन रेटिंग यूनिट ने हड्डियों की कार्बन रेटिंग यूनिट से पता लगाएं कि यह हड्डियां 850 ईसवी पूर्व की है कंकाल की खोपड़ी के स्ट्रक्चर को देखकर हैदराबाद और लंदन के कुछ वैज्ञानिकों ने यह निर्णय लिया कि उनकी मौत किसी महामारी से नहीं बल्कि तेज ओलो की आंधी से हुई नर कंकालों की वजह से यह स्थान बिल्कुल प्रसिद्ध है |
2 . Jatinga घाटी
Jatinga valley एक घाटी है जो भारत के उत्तर पूर्वी राज्य असम में स्थित है यह घाटी पक्षियों के आत्महत्या के कारण सुर्खियों में हैं यहां एक पक्षी आत्महत्या नहीं करता बल्कि पक्षियों का समूह ही आत्महत्या करता है घाटी की तलहटी में कूदकर पक्षियों का समूह आत्महत्या कर लेता है आज तक इस रहस्य का कोई पता नहीं लगा सका की कौन सी ताकत है जो पक्षियों को यह आत्महत्या करने की प्रेरणा देती है और यह मानसून के समय में बहुत ज्यादा होता है अंधेरी और कोहरे वाली रात में पक्षियों के आत्महत्या के मामले ज्यादा सामने आते है.
यह सितंबर से नवंबर के बीच बहुत ज्यादा होता है कि पक्षी हर रोज आत्महत्या कर रहे हैं इस बारे में लोगों की अलग अलग धारणा है वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि यह किसी भूत-प्रेत का साया है जिससे पक्षी आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन कुछ वैज्ञानिक धारणा है वैज्ञानिकों का कहना है कि वहां कई जगह से पक्षी आने के कारण संतुलन नहीं बनता और पक्षी आपस में और या किसी चीजों से टकराकर मर जाते हैं लेकिन डॉक्टर सेम गुप्ता ने कुछ रिसर्च के बाद पता लगाया कि यह वहां के मौसम और चुंबकीय शक्तियों के कारण होता है सर्दियों के टाइम में शाम के समय वहां के चुंबकीय शक्तियों में तेजी से बदलाव आता है जिसके कारण पक्षी रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं और वह वहां पेड़ों या किसी अन्य चीज से टकरा कर घायल होकर मर जाते हैं बात चाहे कुछ भी हो लेकिन यह जगह पक्षियों के आत्महत्या के मामले मेंदुनिया भर में रहस्य बना हुआ है |
3 . लाल बारिश कोट्टायम में
कोट्टायम एक जगह है जो भारत के केरल राज्य में स्थित है वह रहस्यम दब गई जब वहा 25 जुलाई से 23 मई तक 2 महीने तक लाल बारिश होती रही सब को काफी आश्चर्य हुआ कि यह कोई आम घटना नहीं थी वैसे तो यह पहले भी हो चुकी थी पर वैज्ञानिकों ने जब जांच की तो उन्हें पानी में रंगीन जीवित कोशिकाओं का पता चला 2006 में जाच के बाद कुछ शोधकर्ताओं ने इसे अंतरिक्ष की कोशिकाओं के रूप में माना था क्योंकि यह माइक्रोस्कोप में या जैविक कोशिका जैसी दिख रही थी कोशिका दिख रही थी जिससे पानी का रंग लाल हो रहा था इस लाल रंग की बारिश के बारे में को सपष्ट तरफ सामने नहीं आया.

लेकिन फिर भी विज्ञानिकों की कुछ तर्के थी कुछ का तो कहना था कि यह उल्का विस्फोट के कारण हुई है पर यह भी एक तर्के थी कि यह बारिश हुआ वहा के पेड़ों में पाए जाने वाले सवाल की वजह से हुई हो पर यह कारण पता नहीं चला है कि कितनी मात्रा में सवाल वाष्पित कैसे हो सकता है इसे लाल रंग की बारिश हो जाए इसके बारे में और भी अनेक तरफ दिए गए पर इस लाल रंग की बारिश का आज तक कोई पता नहीं चला|
4 . Twin Town
केरल के मरियम जिले में स्थित कोडिन्ही गांव जुड़वा गांव के नाम से जाना जाता है यहां पर वर्तमान में करीब 350 जुड़वा जोड़े रहते हैं जिनमें नवजात शिशु से लेकर 65 साल के बुजुर्ग तक शामिल है विश्व में हर हजार बच्चों के ऊपर चार जुड़वा जोडे पैदा होते हैं और एशिया में तो यह औसत और भी कम है लेकिन कोडिन्ही में हर हजार बच्चों के ऊपर 45 जुड़वा जोड़े पैदा होते हैं कोडिन्ही एक मुस्लिम बहुल गांव है जिसकी आबादी करीब 2000 है इस गांव में घर स्कूल बाजार हर जगह हम शक्ल नजर आ जाते हैं सन 2008 में 300 इस गांव में 15 जुड़वा बच्चे जन्मे थे.

जो 1 साल में जुड़ने जन्मे सबसे ज्यादा जुड़वा बच्चे थे अपनी ऐसी खूबी के चलते कोडिन्ही विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो चुका है दुनिया के ज्यादा बड़े मीडिया हाउस इस गांव की स्टोरी को कवर कर चुके हैं शुरू के सालों में कोई एक दो जुड़वा बच्चे पैदा होते थे बाद में इसमें तेजी आई अब तो बहुत ही ज्यादा रफ्तार से इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कुल जुड़वा के आधे पिछले 10 साल में पैदा हुए कोडिन्ही एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थान बन चुका है काफी संख्या में यहां पर्यटक आते हैं रिसर्च टीम आती रहती है पर आज तक कोई भी कोडिन्ही में जुड़वा बच्चे पैदा होने की सही कारण नहीं बता सका पहले डॉक्टरों ने तर्क दिया था कि यहां के खान पान के कारण ऐसा हो रहा है पर इस इलाके का लोगों का खान-पान केरल के दूसरे इलाकों के समान है इसलिए इस तरह को खारिज कर दिया गया इसके अलावा डॉक्टर कोई दूसरी तर्क नहीं ढूंढ पाए आज तक |
5 . Magnetic Hill
लद्दाख की मेगनेटिक हिल लद्दाख में एक चुंबकीय पहाड़ है जो धातुओं को अपनी ओर खींचता है और धातु से बने साधनों को भी अपनी ओर खींचता है यह पहाड़ भारत के लेह से 30 किलोमीटर दूर लेह कारगिल हिल हाईवे पर स्थित है इस पहाड़ी के सिंह पूर्वी हिस्से में सिंधु नदी बहती है इस मैग्नेटिक हिल को ग्रेविटी हिल के नाम से भी जाना जाता है माना जाता है कि इस पहाड़ पर गुरुत्वाकर्षण का नियम नियम खत्म हो जाता है.
गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार यदि हम किसी वस्तु को ढलान पर छोड़ दें तो वह नीचे की तरफ जाती है लेकिन तुम किया पहाड़ी पर ऐसा नहीं होता ऐसा माना जाता है यदि हम कार को गियेर में डालकर छोड़ दें तो वह कार चुंबकीय पहाड़ पर नीचे की तरफ न जाकर ऊपर की ओर चलती है कहा जाता है कि यदि कारों का इंजन बंद कर दिया जाता है तो भी कार पहाड़ी की ओर ओर खींचती है भारत तिब्बत पुलिस सीमा के जवानों ने तो यहां तक बताया है इस पहाड़ के ऊपर से गुजरने वाले विमानों को चुंबकीय क्षेत्र से बचने के लिए दूसरी जगह की तुलना में ज्यादा ऊंचाई पर उठना पड़ता है कहीं चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आ गया तो वैसे ही झटके लगते हैं जैसे हवा के दबाव वाले क्षेत्र में लगते हैं इस ग्रेविटी हिल को वहां के स्थानीय प्रशासन ने जगह-जगह बोर्ड लगाकर चिन्हित भी गया है वैज्ञानिक इस वजह के बारे में कई कई कारण देते हैं उनके हिसाब से इस पहाड़ी के आसपास की क्षेत्रीय सरचना दृष्टि भ्रम जैसा माहौल पैदा करती है जैसे जैसे नीचे की तरफ देखती हुई वस्तु लटकती हुई लुढ़कते हुई ऊपर की तरफ लुढ़कते भी लगती है इसके अलावा दूसरा कारण यह दिया गया है दृष्टि भ्रम की स्थिति में कोई चीज अपेक्षाकृत छोटी या बड़ी दिखाई देती है इन सभी भाइयों के अलावा 1:00 बजे क्षेत्र में सड़कों पर क्षेत्रीय सतल का स्तन का समांतर होना भी मानी जाती है ना होना भी मानी जाती है फिलहाल सही वजह जो भी हो लेकिन आप लोगों के विदेशी झुमके पार्टी के रुप में मान्यता मिली हुई है